तारों की चमक देखी मदहोश आँखों में जहाँ कभी तन्हाई का सूनापन था
मेघ की गर्जन से फिर हिला मन
कुछ हसरतें फिर मचल उठी हैं के सितारे अब धरती पे हैं...
चमकते उनकी आँखों में और हम ढूंढा करतें हैं
कहीं उन आँखों में थोड़ी सी जगह मिल जाए.... बसने। .....
त्रिपु धर
मेघ की गर्जन से फिर हिला मन
कुछ हसरतें फिर मचल उठी हैं के सितारे अब धरती पे हैं...
चमकते उनकी आँखों में और हम ढूंढा करतें हैं
कहीं उन आँखों में थोड़ी सी जगह मिल जाए.... बसने। .....
त्रिपु धर
No comments:
Post a Comment