इन्तेजार करो और उन्हें पता भी न चले.... दीदार करो अपनी आँखों से। ...के उनको आभास भी न हो। ....क्या ऐसा हो सकता है की हसरतें बनती रहे और उनकी तरंग भी न हो... दिल समझता है दिल की जुबान। ..काश थोड़ी हिम्मत की होती। . एक कदम बढ़ाने की........
त्रिपु धर
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